आध्यात्मिक नाम: स्वामी सहजानंद सरस्वती • संस्थापक: सिद्ध महामृत्युंजय शक्तिपीठम, मयाड़ (हिसार)
परम पूज्य स्वामी सहजानंद नाथ जी महाराज (सांसारिक नाम: सुनील कुमार सूरी) एक सिद्ध योग साधक, दार्शनिक, पत्रकार तथा सनातन संस्कृति के अग्रदूत हैं जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वैदिक मंत्र विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण एवं निर्धन-असहाय वर्ग के कल्याण हेतु समर्पित कर दिया है।
19 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन का परित्याग कर सतपुड़ा व कैलाश के जंगलों में गहन साधना से लेकर विश्व के विशालतम महामृत्युंजय यंत्र की स्थापना तक के प्रमुख पड़ाव।
स्वामी जी ने मात्र 19 वर्ष की अल्पायु में गृहत्याग किया और आत्म-साक्षात्कार की खोज में सतपुड़ा के सघन वनों एवं कैलाश मानसरोवर की दुर्गम गुफाओं व वनों में वर्षों तक निराहार व कठोर तपस्या की।
वर्ष 2000 में हरियाणा के मयाड़ (हिसार) में 'सिद्ध महामृत्युंजय ज्योतिष एवं अनुष्ठान केंद्र' (महामृत्युंजय शक्ति पीठम) की नींव रखी, जो आज संपूर्ण विश्व में वैदिक शांति, मंत्र-साधना व कष्ट निवारण का मुख्य केंद्र है।
महाकुंभ 2025 के पावन अवसर पर प्रयागराज की पवित्र त्रिवेणी संगम भूमि पर 52 × 52 × 52 फीट का भव्य महामृत्युंजय यंत्र अस्थायी रूप से स्थापित किया गया, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं व संतों ने दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की।
हरियाणा के हिसार स्थित मयाड़ आश्रम में 52 × 52 फीट का विशाल सिद्ध महामृत्युंजय यंत्र स्थायी रूप से स्थापित किया गया है, जो विश्व भर के श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय ऊर्जा-केंद्र एवं महातीर्थ बन चुका है।
पूज्य स्वामी जी ने महामृत्युंजय चालीसा व आरती की रचना की। यह पावन स्तुति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है और इसका प्रयोग भारत के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में पूजा-अर्चना एवं आरती हेतु नित्य श्रद्धापूर्वक किया जाता है।
मयाड़ शक्तिपीठ परिसर में 'महामृत्युंजय अंतर्राष्ट्रीय योग एवं ज्योतिष अनुसंधान केंद्र' की नींव रखी, जहाँ प्राचीन वैदिक परंपराओं, ध्यान पद्धतियों एवं स्वास्थ्य विज्ञान पर उच्चस्तरीय शोध व प्रशिक्षण संचालित होते हैं।
स्वामी जी का संकल्प केवल आध्यात्मिक चेतना तक सीमित नहीं, अपितु पर्यावरण संरक्षण व समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान तक फैला हुआ है।
पॉलिथीन के उपयोग को समाप्त करने, कपड़े के थैलों के निःशुल्क वितरण, सघन पौधारोपण तथा घर-घर गमले वितरित करने का ऐतिहासिक अभियान चलाया।
पर्यावरण शुद्धि, जन-स्वास्थ्य (विभिन्न महामारी, बीमारियों व आपदाओं से बचाव) तथा विश्व शांति हेतु हजारों महायज्ञों, गायत्री आहुतियों एवं वैदिक महामृत्युंजय सम्मेलनों का सफल संयोजन व संचालन किया।
स्वामी जी न केवल आध्यात्मिक तपस्वी हैं बल्कि एक सिद्ध लेखक, राष्ट्रीय संपादक तथा प्रबुद्ध मीडिया मार्गदर्शक भी हैं।
राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिका "सनद रहे" (Sanad Rahey) के मुख्य संपादक के रूप में सामाजिक व आध्यात्मिक चिंतन का मार्गदर्शन।
पंजाब केसरी, हिंदुस्तान टाइम्स, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका आदि प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों के लिए नियमित लेखन व संपादन कार्य।
विभिन्न राष्ट्रीय समाचार चैनलों (India TV, IBN7, P7 News आदि) पर आध्यात्मिक, वैदिक एवं समसामयिक सामाजिक विषयों के मुख्य वक्ता।
सनातन सुर प्राइवेट लिमिटेड (Sanatan Sur Private Limited) के निदेशक के रूप में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदा के संरक्षण हेतु नेतृत्व।
स्वामी जी के पर्यावरण, ज्योतिष, आध्यात्मिक अनुसंधान एवं जनकल्याणकारी कार्यों को राज्य सरकारों, राष्ट्रीय संस्थाओं एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों द्वारा सम्मानित किया गया है।
नेशनल एस्ट्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस, लखनऊ (National Astrology Conference, Lucknow)
पर्यावरण संरक्षण, मिशन ग्रीन एवं विशिष्ट सामाजिक कार्यों हेतु राज्य स्तरीय सम्मान।
ओडिशा सरकार के वैदिक ज्योतिष वैज्ञानिक संस्थान द्वारा प्रदत्त।
प्रतिष्ठित कामाख्या गुरुकुल द्वारा तंत्र-मंत्र एवं वैदिक अनुसंधान हेतु।
अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन (मॉरीशस) द्वारा विश्वस्तरीय सम्मान।
भृगु ज्योतिष संस्थान, जालंधर द्वारा वैदिक ज्योतिष में योगदान हेतु।
विश्व ज्योतिष परिषद, कोलकाता द्वारा सर्वोच्च उपाधि।
वैदिक मंत्र विज्ञान एवं ग्रह दोष निवारण शोध हेतु स्वर्ण पदक से सम्मानित।
सिद्ध महामृत्युंजय शक्तिपीठ मयाड़ (हिसार) में आपका स्वागत है। विश्व के सबसे बड़े 52 फीट महामृत्युंजय यंत्र के दर्शन, आध्यात्मिक परामर्श एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु समय-स्लॉट पूर्व-निर्धारित करें।