37 वर्षों की घोर तपस्या और साधना के बाद तैयार महामृत्युंजय यंत्र पर नाग पंचमी के पावन दिन होने जा रहा है भव्य बेलपत्र अर्पण महाअनुष्ठान।
आध्यात्मिक गुरु, योग साधक, शिव भक्त
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक
आयोजकों के अनुसार, 37 वर्षों की घोर तपस्या और साधना के बाद तैयार हुआ यह महामृत्युंजय यंत्र प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अस्थायी रूप से स्थापित किया गया था, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसके दर्शन किए। अब यह यंत्र हिसार के मयड़ गांव में स्थायी रूप से स्थापित है।
37 वर्षों की साधना
प्रयागराज महाकुंभ में अस्थायी स्थापना
श्रद्धालुओं के दर्शन
मय्यड़, हिसार में स्थायी स्थापना
17 अगस्त 2026 को महामृत्युंजय यंत्र पर 5 करोड़ बेलपत्र अर्पित करने का महाअनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
माना जाता है कि बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
श्रद्धा से बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा मानसिक शांति और सकारात्मक भाव से जुड़ी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को दूर करने में सहायता मिलती है।
कई शिव-उपासना परंपराओं में बेलपत्र को ग्रह एवं जीवन से जुड़े कष्टों की शांति के लिए अर्पित किया जाता है।
बेलपत्र की तीन पत्तियों को परंपरागत रूप से त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तथा शिव के विभिन्न स्वरूपों से जोड़ा जाता है। इसलिए त्रिदल बेलपत्र शिव पूजा में विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
इस पावन महाअनुष्ठान में सहभागी बनने के लिए नीचे अपना विवरण दर्ज करें।
17 अगस्त 2026, नाग पंचमी के पावन अवसर पर।
मयड़ गांव, हिसार, हरियाणा।
नाम, गोत्र और मोबाइल नंबर देकर संकल्प फॉर्म भरें।
501, 1008, 2100, 5100, 11000, 51000, 1,00,000 या 1,51,000 बेलपत्र।
आयोजन की टीम आवश्यकता अनुसार दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकती है।
अपने नाम और गोत्र से संकल्प लेकर महामृत्युंजय यंत्र पर बेलपत्र अर्पण महाअनुष्ठान में सहभागी बनें।
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